भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। हिन्दू पंचांग के अनुसार आज रविवार है। शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, 8 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण पंचमी के साथ 'रंग पंचमी' का उत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।राहुकाल सायं 04:57 बजे से सायं 06:25 बजे तक
8 मार्च 2026 (रविवार) तिथि:
कृष्ण पक्ष पंचमी – रात 9:11 बजे तक, इसके बाद षष्ठी शुरू होगी।
नक्षत्र: - स्वाती नक्षत्र – दोपहर लगभग 1:31 बजे तक, इसके बाद विशाखा नक्षत्र प्रारंभ।
योग: - ध्रुव योग – सुबह लगभग 7:04 बजे तक, उसके बाद अगला योग शुरू।
पक्ष: कृष्ण पक्ष
वार: रविवार
सूर्योदय – सूर्यास्त:
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सूर्योदय: 06:46 AM
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सूर्यास्त: 06:29 PM
चंद्रमा संबंधी जानकारी:
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चंद्रोदय: 11:02 PM
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चंद्रास्त: 09:58 AM
राहुकाल:
अन्य जानकारी:
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विक्रम संवत: 2083
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शक संवत: 1947
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ऋतु: वसंत ऋतु
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अयन: उत्तरायण
विशेष:
धर्म और ज्योतिष की दृष्टि से आज का दिन विशेष महत्व रखता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। यह तिथि रात लगभग 9:11 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
आज स्वाती नक्षत्र दोपहर लगभग 1:31 बजे तक रहेगा, उसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं ध्रुव योग सुबह लगभग 7:04 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अगला योग प्रारंभ होगा।
सूर्य के उदय और अस्त का समय भी दिनचर्या और शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आज सूर्योदय सुबह 6:46 बजे और सूर्यास्त शाम 6:29 बजे होगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का राहुकाल शाम 4:57 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा। इस समय में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए।
अगर चंद्रमा की स्थिति की बात करें तो चंद्रोदय रात 11:02 बजे और चंद्रास्त सुबह 9:58 बजे होगा। चंद्रमा आज तुला राशि में स्थित रहेगा।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस समय विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1947 चल रहा है। सूर्य की गति के अनुसार अभी उत्तरायण और मौसम की दृष्टि से वसंत ऋतु का समय है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास में भगवान विष्णु की पूजा, दान और जप-तप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगल कामना करते हैं।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष पंचमी को रंग पंचमी मनाई जाती है। यह पर्व होली के पांचवें दिन भगवान कृष्ण और श्री राधा रानी जी के दिव्य प्रेम की स्मृति में मनाया जाता है, जिसे देव पंचमी भी कहते हैं। भारत के कई हिस्सों, विशेषकर मथुरा और उज्जैन में इस दिन होली उत्सव का समापन होता है उज्जैन में हुरियारों की टोलियों पर सुगंधित रंगों की बौछार की जाती है, जो जीवन के सही संचालन और आपसी प्रेम का प्रतीक है। यह उत्सव भक्तों के मन में नई उमंग भरता है और उनकी बड़ी इच्छाएं पूरी करने की प्रेरणा देता है। बेहतर मार्गदर्शन और जीवन के सही संचालन के लिए आप एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं।