आज का पंचांग – 6 मार्च 2026
शिमला/धर्मशाला: भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार है। शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, 6 मार्च 2026 , चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज शाम में 05 बजकर 53 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। राहुकाल प्रातः 11:05 बजे से प्रातः 12:33 बजे तक विशेष: आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत और व्रत पूजा का दिन है, खासकर गणेश जी की पूजा के लिए। 6 मार्च 2026, शुक्रवार का दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि लेकर आया है, जो शाम तक जारी रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। धार्मिक और शुभ कामों के साथ-साथ व्रत और पूजा-पाठ के लिए आज का पंचांग निम्नलिखित है—
📅 तिथि, पक्ष और वार
तिथि: कृष्ण पक्ष तृतीया — आज तिथि शाम लगभग 5:56 बजे तक रहेगी और इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी।
पक्ष: कृष्ण पक्ष
वार: शुक्रवार — शुक्रवार को माता लक्ष्मी और संतोषी माता को समर्पित माना जाता है।
विशेष: आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत और व्रत पूजा का दिन है, खासकर गणेश जी की पूजा के लिए।
🌙 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: हस्त — सुबह तक उपस्थित रहेगा, इसके बाद चित्रा नक्षत्र प्रभावी होगा।
योग: गण्ड एवं वृद्धि योग — दिन के अलग-अलग समय में प्रभावी रहेंगे।
करण: विष्टि, बव और बालव — दिन भर बदलते हिसाब से क्रम में होंगे।
☀️ सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र
सूर्योदय: लगभग 06:41 बजे
सूर्यास्त: लगभग 18:23 बजे
चन्द्रोदय: रात्रि 09:14 बजे के आसपास
चंद्रास्त: सुबह लगभग 08:01 बजे
दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक शुभ ऊर्जा से भरा रहेगा और रात्रि में चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व रहेगा।
🕐 शुभ-अशुभ समय (मुहूर्त)
📌 शुभ मुहूर्त:
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के लगभग 12:09 – 12:56 बजे — शुभ कार्यों के लिए उत्तम समय।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह का प्रारंभिक समय — पूजा, ध्यान और पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ।
📌 अशुभ मुहूर्त:
राहुकाल: लगभग 11:04 – 12:32 बजे — नई शुरुआत से बचें।
गुलिक काल: सुबह के समय — कुछ विधियों में ये समय अशुभ माना जाता है।
यमघंट काल: दोपहर बाद — विचारयुक्त समय हो सकता है।
📜 धार्मिक महत्त्व और सलाह
आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी होने के कारण भगवान गणेश की पूजा एवं संकल्प का विशेष महत्व है। चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करने से जीवन में विघ्नों का नाश माना जाता है। पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान आज के शुभ मुहूर्त के अनुसार किए जा सकते हैं।
📌 संक्षेप:
– तिथि: कृष्ण तृतीया (शाम तक), फिर चतुर्थी
– नक्षत्र: हस्त → चित्रा
– योग: गण्ड, वृद्धि
– शुभ समय: अभिजीत, ब्रह्म मुहूर्त
– अशुभ समय: राहुकाल, गुलिकाल
– विशेष: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत महान शुभ कार्य माना जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदूमास और पक्ष आदि की जानकारी देते हैं।