🗞️ आज का पंचांग – 4 मार्च 2026 (बुधवार) Dateline Desk | धर्म-ज्योतिष विशेष
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। दिन बुधवार होने के कारण यह दिन भगवान बुध एवं गणेश पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज बुधवार है। शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, 4 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा है, आज पूरे देश में रंगों का महापर्व होली (धुलंडी) बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। राहुकाल दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक
📅 तिथि व वार
तिथि: कृष्ण पक्ष प्रतिपदा सायं 04:48 बजे तक (इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ)
वार: बुधवार
मास: फाल्गुन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
🌙 नक्षत्र
प्रातःकाल तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र
इसके बाद उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का आरंभ
☀️ सूर्योदय – सूर्यास्त (उत्तर भारत के अनुसार)
सूर्योदय: प्रातः लगभग 6:40 बजे
सूर्यास्त: सायं लगभग 6:20 बजे
⏳ शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: दोपहर लगभग 12:00 से 1:30 बजे तक (नए कार्यों से बचें)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के आसपास (शुभ कार्यों हेतु अनुकूल)
🪔 धार्मिक महत्व
फाल्गुन मास का यह समय होली उत्सव के बाद का माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, व्रत-पूजन और नए संकल्प लेना शुभ माना गया है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
बुधवार, 04 मार्च 2026 को पूरे देश में रंगों का महापर्व होली (धुलंडी) बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दिवाली के बाद इसे सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। पूर्णिमा तिथि 02 मार्च की शाम 05:55 बजे से शुरू होकर 03 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी।
ब्रज क्षेत्र की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और गोकुल की होली के साथ-साथ बरसाना की लट्ठमार होली का अपना एक अलग ही महत्व और आनंद है। ज्यादातर जगहों पर यह पर्व दो दिनों तक चलता है। पहले दिन को छोटी होली या होलिका दहन कहा जाता है, जिसे दक्षिण भारत में 'काम दहनम' के नाम से भी जानते हैं। दूसरे दिन मुख्य होली खेली जाती है, जो आपसी प्रेम और मेल-मिलाप का प्रतीक है।
हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदूमास और पक्ष आदि की जानकारी देते हैं।
⚠️ नोट: पंचांग के समय स्थान विशेष के अनुसार बदल सकते हैं। अपने शहर के अनुसार सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
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