🗓️ आज का पंचांग – 2 मार्च 2026 (सोमवार)
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज सोमवार है। शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, 2 मार्च 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल चतुर्दशी तिथि है। राहुकाल प्रातः 08:12 बजे से प्रातः 09:39 बजे तक , आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
वार: सोमवार
मास: फाल्गुन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: शुक्ल चतुर्दशी सायं 5:55 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ
संवत: विक्रम संवत 2082
शक संवत: 1947
ऋतु: वसंत ऋतु
अयन: उत्तरायण
🌅 सूर्य एवं चन्द्र विवरण
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🌞 सूर्योदय: प्रातः 6:47 बजे
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🌇 सूर्यास्त: सायं 6:23 बजे
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🌙 चन्द्रोदय: सायं 5:33 बजे
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🌙 चन्द्रास्त: प्रातः 6:34 बजे
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🌙 चन्द्र राशि: कर्क राशि
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☀️ सूर्य राशि: कुम्भ राशि
🕉️ तिथि विवरण
👉 पूर्णिमा व्रत 3 मार्च 2026 को रहेगा।
⭐ नक्षत्र
🔯 योग
🕰️ करण
⛔ अशुभ मुहूर्त
राहुकाल
यमगण्ड काल
गुलिक काल
दुर्मुहूर्त
✅ शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त
अमृत काल
विजय मुहूर्त
🌿 विशेष जानकारी
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आज फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी है।
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शाम से फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होगी।
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होली पूर्णिमा 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
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सोमवार होने के कारण भगवान शिव पूजा का विशेष महत्व है। 🔱
आज चतुर्दशी तिथि और सोमवार का संयोग शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है। शाम से पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होने से धार्मिक कार्यों की तैयारी शुरू हो जाती है।
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन, जिसे छोटी होली या होलिका दीपक भी कहते हैं, प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ होता है। इसके लिए पूर्णिमा तिथि का होना आवश्यक है। पूर्णिमा के शुरुआती हिस्से में भद्रा का वास होता है, और मान्यताओं के अनुसार भद्रा के समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए।
धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। भद्रा काल के बीत जाने के बाद ही होलिका दहन करने का नियम है, ताकि जीवन में सकारात्मकता आए और सभी कष्टों का निवारण हो सके। भक्त इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और सहजता के साथ निभाते हैं।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदूमास और पक्ष आदि की जानकारी देते हैं।