ज्वालामुखी (हिमाचल प्रदेश) – भारतीय सेना की प्रतिष्ठित डोगरा रेजिमेंट और हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर के बीच का गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव सदियों पुराना है। इस रेजिमेंट के जवानों का युद्धघोष "ज्वाला माता की जय" न केवल दुश्मनों में खौफ पैदा करता है, बल्कि उनकी अटूट श्रद्धा का भी प्रतीक है।डोगरा रेजिमेंट की स्थापना 1858 में ब्रिटिश काल में सर फ्रेडरिक रॉबर्ट्स द्वारा आगरा लेवी के रूप में की गई थी, जिसे बाद में 37, 38 और 41 डोगरा बटालियनों में विस्तार मिला।
1922 में इन्हें मिलाकर 17वीं डोगरा रेजिमेंट बनाई गई, जो आज स्वतंत्र भारत की डोगरा रेजिमेंट के नाम से जानी जाती है। मुख्यालय अयोध्या में स्थित इस रेजिमेंट के जवान मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश (विशेषकर कांगड़ा) और उत्तरी पंजाब के पहाड़ी इलाकों से आते हैं। इन्हें "Gentlemen Warriors" (जैंटलमेन वारियर्स) कहा जाता है, क्योंकि ये शारीरिक-मानसिक रूप से मजबूत होने के साथ विनम्र और शिष्ट भी होते हैं।
रेजिमेंट का प्रतीक शेर है, जो देवी दुर्गा का वाहन माना जाता है। जवानों की टोपी पर भी शेर का चिन्ह लगा होता है। युद्ध में जाने से पहले और बाद में डोगरा जवान ज्वालामुखी मंदिर में माथा टेकते हैं, जहां देवी की ज्वालाएं युगों से जल रही हैं और कोई मूर्ति नहीं है – सिर्फ आदिशक्ति की अनंत ज्योति।इस आस्था का हालिया उदाहरण जनवरी 2026 में देखने को मिला, जब 10 डोगरा रेजिमेंट के समस्त परिवार की ओर से माता के चरणों में 21 किलोग्राम वजनी विशाल घंटी अर्पित की गई।
इस अवसर पर मंदिर परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घंटी स्थापित की गई, और मंदिर प्रशासन ने रेजिमेंट के इस भावपूर्ण योगदान की सराहना की।इससे पहले भी डोगरा रेजिमेंट ने मंदिर में कई स्मारक बनवाए हैं, जैसे:400 किलोग्राम पीतल धातु के शेरों की जोड़ी (2023 में 20वीं बटालियन द्वारा स्थापित)।
अन्य बटालियनों द्वारा संगमरमर के शेर और मुख्य द्वार जैसे योगदान।
डोगरा रेजिमेंट ने 1947-48 के कश्मीर युद्ध, 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (जिसमें पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए), और 1999 के कारगिल युद्ध (टाइगर हिल मिशन) में अदम्य साहस दिखाया। इन युद्धों में 9 महावीर चक्र, 37 वीर चक्र सहित दर्जनों वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए।यह संबंध सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक है। ज्वाला माता की जय बोलकर डोगरा जवान युद्ध में उतरते हैं, जो उनकी बहादुरी और मातृभक्ति का जीता-जागता प्रमाण है।