भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, गुरुवार , 19 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल द्वितीया तिथि है आज फुलेरा दूज का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। दोपहर 02:00 से 03:25 तक राहुकाल रहेगा
📅 आज का पंचांग — 19 फरवरी 2026 (गुरुवार)
तिथि: शुक्ल द्वितीया – सायं 03:58 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र: सायं 08:52 बजे तक
नक्षत्र स्वामी: बृहस्पतिदेव
✨ शुभ मुहूर्त:
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 01:00 बजे से दोपहर 02:34 बजे तक
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:25 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 09:46 बजे से प्रातः 11:10 बजे तक
यमगण्ड: प्रातः 06:56 बजे से प्रातः 08:21 बजे तक
🌅 सूर्योदय और सूर्यास्त:
सूर्योदय: लगभग 6:56 AM
सूर्यास्त: लगभग 6:14 PM
🌸 त्यौहार और विशेष दिन:
आज फुलेरा दूज का शुभ पर्व भी है — यह होली के पर्व की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है और खासकर भक्ति तथा फूलों के उत्सव के रूप में प्रतिष्ठित है।
📌 निष्कर्ष:
आज का दिन पंचांग के अनुसार शुभता और ऊर्जा से भरपूर है — सिद्ध योग व अभिजीत मुहूर्त के कारण शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय मिल रहा है। राहुकाल जैसे अशुभ काल से परहेज कर दिन का आयोजन करें और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण फुलेरा दूज का आनंद लें।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
आज फुलेरा दूज है
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पावन पर्व मनाया जाता है। यह उत्सव विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की भक्ति को समर्पित है। इस दिन मंदिरों में ठाकुर जी का फूलों से भव्य श्रृंगार किया जाता है और उन्हें गुलाल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन से होली के पर्व की शुरुआत मानी जाती है। भक्तजन भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं और प्रेम के इस उत्सव में आनंद लेते हैं।