ज्वालामुखी में धूमधाम से मनाई गई बसंत पंचमी
विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती जी के आराधना पर्व
बसंत पंचमी आज ज्वालामुखी में धूमधाम से मनाया गया। भारी बारिश व ठिठुरती ठंड के बावजूद लेगों ने श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मां सरस्वती की वंदना की।
लोरेट फार्मेसी कालेज में बसंत पंचमी पूजन आयोजन किया गया । संस्थान में बसंत पंचमी के अवसर पर पूजन कार्यक्रम प्रशासनिक भवन में आयोजित किया गया। जिसमें सभी विभागाध्यक्ष , संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं छात्रों ने विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की अराधना की।
वहीं , लक्ष्मी नारायण मंदिर बोहण ज्वालामुखी में भी बसंत पंचमी धूमधाम से मनाई गई। बडी तादाद में श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर पूजा अर्चना कर भजन कीर्तन कर मां सरस्वती का गुणगान किया।
इस बीच , स्थानीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल में भी बसंत पंचमी मनाई गई।
“बसन्त पंचमी”
बसन्त पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं।
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें बसन्त लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। बसन्त ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह बसन्त पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।