हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि केरल के राष्ट्रीय विचारों के विद्वान राज्यपाल आरीफ मुहम्मद खां ने एक सदी पहले अलीगढ़ मुस्लिम विष्व विद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के हवाले से एक अत्यन्त महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा - ”जो कोई भी भारत में पैदा हुआ भारत का अन्न और जन ग्रहण करता है वह हिन्दु है।“ आरीफ मुहम्मद खां कई बार इस प्रकार के विचार प्रकट कर चुके है। वे कहते है कि उन्हें भी हिन्दु समझा जाए।
शांता कुमार ने कहा सर्वाेच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त मुख्य न्यायधीश श्री छागला ने कहा था - ” मेरी रगों में ऋृशि मुनियों का खून दौड़ता हैं मेरे पूरखों ने केवल पूजा करने का तरीका बदला था।“
उन्होंने कहा कश्मीर के शेख अबदुल्ला कई बार कह चुके है कि उनके पूवर्ज कश्मीरी पण्डित थे इस लिए वे केवल शेख नही कश्मीर पण्डित है।
शांता कुमार ने कहा भारत के एक विद्वान श्री वेद प्रताप वैदिक जी ने भी इन्हीं विचारों का समर्थन करके कहा है कि हिन्दु शव्द भूगौलिक है धार्मिक नही।
उन्होंने कहा स्वामी विवेकानन्द जी ने अपने विष्व प्रसिद्ध शिकागो के भाषण में यही बात कहीं थी कि हिन्दूत्व पूजा पद्धती नहीं है यह पूजा पद्धतियों की नदियों का महा समुंदर है। जिस प्रकार हर नदी अपने अपने रास्ते से चल कर एक समुंदर में पहुंचती है उसी प्रकार सभी धर्मो के रास्ते एक ही परमेष्वर के पास पहुंचते है।
उन्होंने कहा इसी सम्बंध में एक पुराण के इस ष्लोक से बढ़कर और प्रमाण क्या हो सकता है:
आसिन्धो सिन्धु पर्यन्ताः यस्य भारत भूमिकाः
पितृभू पुण्यभूश्रैव सः वै हिन्दू इति स्मृतः
अर्थात हिमालय से लेकर समुंदर तक इस भारत को जो व्यक्ति अपनी पुण्य भूमि और पितृ भूमि समझता है वह हिन्दु है।
शांता कुमार ने कहा कि यदि इस सच्चाई को भारत ने स्वीकार किया होता तो 1947 में भारत का विभाजन न होता लाखों वेगुनाहों का नर संहार न होता और करोड़ों विस्थापित न होते। आज भी भारत इस सच्चाई को स्वीकार करे तो सब से बड़ी समस्या समाप्त हो जाये।