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धर्मशाला | जल जनित रोगों से बचाव के लिए लोगों को करें जागरूक

Updated on Sunday, April 28, 2024 04:30 AM IST

CMO Kangra  डा राजेश गुलेरी ने कहा कि गर्मियों के मौसम में जल जनित रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि इन बीमारियों के बारे में व्यक्ति को सही जानकारी हो, ताकि वह उचित समय पर अपना सही इलाज करा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजेश गुलेरी ने सभी स्वास्थ्य विभाग के खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए की शुरुआती गर्मियों के सीजन में जैसे डायरिया, डिसेंट्री, आंतर शोध, टाइफाइड, पीलिया आदि रोगों से बचाव के लिए समुदाय में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि पीने के लिए स्वच्छ पानी का प्रयोग करना चाहिए। पीने के पानी के उपयोग करने से पूर्व उसे कम से कम 1 मिनट के लिए उबाल लेना चाहिए। बाजार से लाई हुई सब्जियां और फलों को अच्छे ढंग से धोना चाहिए।
जल जनित रोग यानी वॉटर बोर्न डिजीज बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स जैसे माइक्रोऑर्गेनिज्म द्वारा दूषित किए गए पानी के संपर्क या सेवन से होती है। यह बीमारियां दूषित पानी पीने, दूषित पानी में तैरने या दूषित पानी से धोए गए भोजन को खाने से व्यक्ति को अपना शिकार बना लेती है। वॉटर बोर्न डिजीज के उदाहरणों में हैजा, टाइफाइड, जिआर्डियासिस और हेपेटाइटिस ए आदि शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि सभी जनजनित बीमारियों के 88% की वजह खराब स्वच्छता, साफ-सफाई और असुरक्षित पानी की आपूर्ति है, तो इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
जल जनित रोग अक्सर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रणाली को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से दस्त, उल्टी , पेट में दर्द, ऐंठन होती है। जल जनित रोग जैसे हेपेटाइटिस के मामलों में शरीर में दर्द के साथ बुखार की समस्या हो सकती है। इसके अलावा उल्टी, भूख की कमी के साथ त्वचा, आंखों और यूरिन में पीलापन नजर आ सकता है। वहीं, टाइफाइड में सिर्फ बुखार और सिर दर्द के लक्षण नजर आते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजेश गुलेरी ने बताय की जलजनित बीमारियों की रोकथाम स्वच्छ और सुरक्षित पानी तक पहुंच सुनिश्चित करने से शुरू होती है। दुर्भाग्य से, बहुत से लोग अभी भी बेहतर जल स्रोतों से वंचित है, जिससे वे रोकथाम योग्य बीमारियों के प्रति संवेदनशील हैं। स्वच्छता और साफ-सफाई जलजनित रोग की रोकथाम की आधारशिला हैं। जल प्रदूषण को रोकने के लिए मानव अपशिष्ट का उचित निपटान, पानी का सुरक्षित भंडारण और पानी के कंटेनरों की नियमित सफाई आवश्यक हैं।
डॉक्टर राजेश गुलेरी ने सभी स्वास्थ्य विभाग के खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए की शुरुआती गर्मियों के सीजन में जैसे डायरिया, डिसेंट्री, आंतर शोध, टाइफाइड, पीलिया आदि रोगों से बचाव के लिए समुदाय में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाया जा सकेl यदि लोगों में इन बीमारियों के बारे में जागरूकता होगी, तो वह इन बीमारियों से बचे रहेंगे l 


जागरूकता शिवरो में लोगों को निम्नलिखित बातों के प्रति जागरूक करें:-
(1) खाना खाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छे ढंग से धोना चाहिएl और शौच जाने के बाद हाथों को ठीक ढंग से साबुन लगाकर धोना चाहिएl
(2) पीने के लिए स्वच्छ पानी का प्रयोग करना चाहिए l पीने के पानी के उपयोग करने से पूर्व उसे कम से कम 1 मिनट के लिए उबाल लेना चाहिएl
(3) बाजार से लाई हुई सब्जियां और फलों को अच्छे ढंग से धोना चाहिएl
(4) बासी और प्रदूषित खाने का उपयोग नहीं करना चाहिए l
(5) बंद बोतल का पानी पीने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देख लेनी चाहिए l
(6) छोटे बच्चों को रोटावायरस की वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए ताकि डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचया जा सके.
(7) समुदाय में ओ आर एस और जिंक टेबलेट का वितरण करना चाहिए l
(8) पानी की टंकी की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए, और उसमें क्लोरीन की गोलियां भी डालनी चाहिए l
(9) बैक्टीरिया को फैलने से रोकने के लिए विशेष रूप से बनाए गए उत्पादों से शौचालय का दैनिक रूप से सफाई करनी चाहिए l
(10) समुदाय में आशा वर्कर द्वारा डायरिया की रोकथाम के लिए ओ आर एस घोल को बनाकर समुदाय में जैसे आंगनबाड़ी केन्द्रो , महिला मंडल , ग्राम पंचायत आदि स्थान में लोगों को बताना चाहिए l
मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सभी ब्लॉक अधिकारियों को इन बातों पर अमल करने के निर्देश दिए और कहा की चिकित्सा अधिकारियों को इन बीमारियों के लक्षणों और संकेतों की पहचान में सतर्क रहना चाहिए, खासकर छोटे बच्चों में जिन्हें अपनी परेशानी बताने में कठिनाई हो सकती है। लक्षणों के होन पर तुरंत अपने नजदिकी स्वास्थ्य संस्थान में जा कर उपचार करवाएं।

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